यहाँ आपके समाचार लेख के लिए उपयुक्त शीर्षक और विवरण दिए गए हैं:
## **शीर्षक और विवरण**
* **शीर्षक:** मंडला: नैनपुर दुष्कर्म मामले में नया मोड़, पीड़िता ने वीडियो साक्ष्य होने का लगाया आरोप; एसपी ने दिए जांच के निर्देश।
* **विवरण:** मंडला के नैनपुर थाने में दर्ज दुष्कर्म मामले में पीड़िता की नई शिकायत के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पीड़िता का दावा है कि आरोपी के पास घटना से संबंधित वीडियो हैं, जिन्हें जब्त करने के लिए एसपी रजत सकलेचा ने थाना प्रभारी और एसडीओपी को वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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## **समाचार रिपोर्ट**
**नैनपुर, मंडला:**
मंडला जिले के नैनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक दुष्कर्म मामले में अब एक नया घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में पुलिस द्वारा आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा चुका है और चालानी कार्रवाई भी पूर्ण कर ली गई है। हालांकि, इस बीच पीड़िता ने पुलिस प्रशासन के समक्ष पुनः एक शिकायत दर्ज कराई है, जिससे मामले में नए साक्ष्यों के जुड़ने की संभावना बढ़ गई है।
**वीडियो साक्ष्य को लेकर नई शिकायत**
पीड़िता ने अपनी नई शिकायत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आरोपी के मोबाइल फोन में उससे संबंधित कुछ आपत्तिजनक वीडियो मौजूद हैं। पीड़िता का कहना है कि इन वीडियो को पुलिस द्वारा जब्त किया जाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि न्यायालय में मामले को और अधिक सशक्त बनाया जा सके और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।
**पुलिस अधीक्षक ने दिए जांच के निर्देश**
मामले की गंभीरता को देखते हुए **पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा** ने संबंधित थाना प्रभारी को इस विषय में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही, एसडीओपी को भी निर्देशित किया गया है कि वे पीड़िता द्वारा उठाए गए पुराने और नए बिंदुओं की सूक्ष्मता से जांच करें। यह जांच तय करेगी कि इन नए तथ्यों को पुराने प्रकरण में शामिल किया जाए या फिर इनके आधार पर अलग से मामला दर्ज किया जाए।
> **”पहले दर्ज मामले में पीड़िता के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दुष्कर्म सहित अन्य संबंधित धाराओं में कार्रवाई करते हुए चालान न्यायालय में पेश किया जा चुका है। अब पीड़िता की इस नई शिकायत पर भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी और इसका त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।”**
> — **रजत सकलेचा, पुलिस अधीक्षक मंडला**
वर्तमान में पुलिस प्रशासन इस दिशा में काम कर रहा है कि यदि वीडियो साक्ष्य बरामद होते हैं, तो उन्हें तकनीकी साक्ष्य के रूप में केस फाइल में जोड़ा जाए ताकि न्याय प्रक्रिया में कोई कमी न रहे।


